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7 June 2026 · 6 min read · हिंदी

मंगल दोष की गणना कैसे करें? पूरी विधि

मंगल दोष की गणना कैसे करें? जानिए लग्न कैसे निकलता है, मंगल की राशि कैसे पता चलती है, और भाव गिनकर मांगलिक होने की सही विधि – कदम-दर-कदम पूरी प्रक्रिया।

मंगल दोष की गणना कैसे करें, यह समझने के लिए तीन चीज़ें एक साथ चाहिए – सही लग्न (जन्म के समय उदय होने वाली राशि), जन्म के क्षण मंगल किस राशि-अंश पर बैठा है, और फिर लग्न से गिनकर यह देखना कि मंगल पहले, चौथे, सातवें, आठवें या बारहवें भाव में आता है या नहीं। ज़्यादातर लोग सीधे पूछते हैं "मांगलिक हूँ या नहीं", जबकि असली सवाल इसके पीछे छिपा होता है – यह जवाब निकलता कैसे है। मांगलिक दोष कब होता है वाले लेख में हमने बताया था कि कौन-से पाँच भाव दोष बनाते हैं; यहाँ एक कदम पीछे जाकर देखते हैं कि लग्न और मंगल की स्थिति निकलती कैसे है, ताकि गिनती का पूरा तरीका – कागज़ पर हो या किसी टूल में – साफ़ समझ आए।

मंगल दोष की गणना कैसे करें: पहला कदम, लग्न निकालना

लग्न वह राशि है जो जन्म के ठीक उस क्षण पूर्व दिशा के क्षितिज पर उदय हो रही थी। इसे निकालने के लिए तीन चीज़ें बिल्कुल सटीक चाहिए – जन्म तिथि, जन्म का समय घंटे-मिनट तक, और जन्म स्थान का अक्षांश-देशांतर। इनमें समय सबसे नाज़ुक कड़ी है। पृथ्वी अपनी धुरी पर लगातार घूमती रहती है, इसलिए लग्न राशि हर करीब दो घंटे में बदल जाती है, यानी हर चार मिनट में लगभग एक अंश आगे खिसक जाती है। जन्म प्रमाणपत्र पर लिखा समय दस-पंद्रह मिनट भी इधर-उधर हो, तो लग्न पूरी तरह बदल सकता है, खासकर अगर जन्म किसी राशि-परिवर्तन (संधि) के आसपास हुआ हो।

गणना निरयण यानी साइडेरियल राशिचक्र पर होती है, पश्चिमी सायन राशिचक्र पर नहीं – इसलिए एक तय अयनांश (ज़्यादातर लाहिड़ी अयनांश) घटाकर असली निरयण लग्न निकाला जाता है। जन्म स्थान का अक्षांश-देशांतर और उस समय का सही टाइम-ज़ोन (और लागू हो तो डेलाइट सेविंग भी) ठीक से न जोड़ा जाए, तो लग्न कुछ डिग्री इधर-उधर खिसक सकता है और पूरा भाव-विभाजन ही गड़बड़ा जाता है।

दूसरा कदम: मंगल की राशि और अंश पता करना

लग्न निकल जाने के बाद अगला काम है यह जानना कि जन्म के उसी क्षण मंगल कहाँ था। इसके लिए पंचांग या एफेमेरिस का सहारा लिया जाता है, जो हर दिन के लिए ग्रहों की राशि और अंश बताती है। राहत की बात यह है कि मंगल चंद्रमा जितना तेज़ नहीं चलता – यह एक राशि में करीब डेढ़ महीने तक टिका रहता है, इसलिए दिन में कुछ घंटों की गड़बड़ी से मंगल की राशि लगभग हमेशा वही रहती है। पर जन्म-तारीख़ गलत दर्ज हो या पंचांग पुराना-गलत हो, तो राशि बदल सकती है, इसलिए भरोसेमंद पंचांग या टूल का इस्तेमाल ज़रूरी है।

तीसरा कदम: लग्न से भाव गिनना

लग्न और मंगल दोनों की राशि मिल जाने पर आखिरी काम बस गिनती का रह जाता है, और यह हिस्सा सबसे सीधा है। लग्न की राशि को पहला भाव मानकर घड़ी की दिशा में आगे गिनते जाएँ, जब तक मंगल की राशि तक न पहुँच जाएँ।

मान लीजिए किसी की लग्न राशि कर्क है और मंगल तुला राशि में बैठा है। कर्क को 1 गिनें, सिंह 2, कन्या 3, तुला 4 – यानी मंगल यहाँ लग्न से चौथे भाव में पड़ा, तो मंगल दोष बनेगा। अब वही मंगल अगर वृश्चिक राशि में होता, तो कर्क से गिनने पर वृश्चिक पाँचवां भाव पड़ता, और वहाँ कोई दोष नहीं बनता। इस छोटे-से उदाहरण से साफ़ पता चलता है कि सिर्फ एक राशि आगे-पीछे होने से नतीजा पूरी तरह पलट सकता है। इसीलिए पहले दो कदम – सही लग्न, सही मंगल-राशि – बिना किसी चूक के होने चाहिए; गिनती खुद तो बस जोड़-घटाव है।

कदमक्या चाहिएगड़बड़ी का असर
लग्न निकालनाजन्म तिथि, सटीक समय, स्थान, अयनांशकुछ मिनट की चूक से भी लग्न राशि बदल सकती है
मंगल की स्थितिजन्म तिथि, भरोसेमंद पंचांग/एफेमेरिसतारीख़ गलत होने पर राशि बदल सकती है, समय की हल्की चूक से आमतौर पर नहीं
भाव गिननालग्न राशि से मंगल राशि तक क्रमांक गिननापिछले दोनों कदम सही हों तो यह चरण यंत्रवत् और निर्विवाद है

चंद्र और शुक्र से गिनती – तरीका वही, आधार बदल जाता है

कई परंपराएँ सिर्फ लग्न पर नहीं रुकतीं – वे यही गिनती चंद्रमा की राशि से, और कुछ में शुक्र की राशि से भी दोहराती हैं। तरीका बिल्कुल वही रहता है: चंद्रमा या शुक्र की राशि को पहला भाव मान लें और मंगल तक गिनें। फ़र्क़ सिर्फ इतना है कि "पहला भाव" किसे माना जाए – लग्न को, चंद्रमा को, या शुक्र को। इसी वजह से कोई व्यक्ति लग्न से मांगलिक न निकले पर चंद्र-गणना से निकल आए, या इसका उल्टा हो जाए – यह गणना की गलती नहीं, बल्कि तीन अलग-अलग मान्य तरीकों का नतीजा है। व्यवहार में लग्न-आधारित गणना को सबसे ज़्यादा वज़न दिया जाता है, चंद्र और शुक्र वाली गणना सहायक संकेत मानी जाती है। इस भेद और भावों की पूरी सूची मांगलिक दोष कब होता है में विस्तार से दी गई है।

हाथ से गणना में गड़बड़ी कहाँ होती है

व्यवहार में ज़्यादातर मतभेद गणित में नहीं, इनपुट में होते हैं:

  • जन्म समय गोल किया गया हो – "सुबह करीब 7 बजे" जैसा अनुमानित समय लग्न बदल सकता है।
  • टाइम-ज़ोन या डेलाइट सेविंग भूल जाना – खासकर विदेश में जन्मे लोगों की कुंडली में यह आम चूक है।
  • शहर की जगह अनुमानित अक्षांश-देशांतर इस्तेमाल करना – बड़े शहर में भी सही निर्देशांक से थोड़ा फ़र्क़ पड़ सकता है।
  • अलग-अलग अयनांश इस्तेमाल होना – कुछ वेबसाइट या सॉफ़्टवेयर अलग अयनांश डिफ़ॉल्ट रखते हैं, जिससे लग्न कुछ अंश खिसक जाता है।

यही वजह है कि दो अलग-अलग जगह से निकाली गई कुंडली में कभी-कभी मांगलिक स्थिति अलग दिख जाती है, जबकि जन्म-विवरण एक ही होते हैं। हाथ से यह सब जोड़ना-घटाना संभव है, पर एक भरोसेमंद कुंडली मिलान टूल में जन्म तिथि, सही समय और स्थान डाल देने भर से लग्न, मंगल की स्थिति और भाव-गणना अपने आप, एक तय अयनांश पर हो जाती है – अनुमान की कोई गुंजाइश नहीं रहती।

भाव मिलना गणना का अंत है, फैसले का नहीं

यह पूरी प्रक्रिया सिर्फ इतना बताती है कि मंगल दोष का योग बनता है या नहीं – यह अपने-आप में शादी के अच्छे-बुरे होने का फ़ैसला नहीं है। कुंडली में कई बार ऐसी स्थितियाँ भी होती हैं जो इस दोष को हल्का कर देती हैं या रद्द कर देती हैं, जैसे मंगल का अपनी या उच्च राशि में बैठना, या दोनों पक्षों का मांगलिक होना। कुछ ज्योतिषी यह भी मानते हैं कि उम्र बढ़ने के साथ, अक्सर 28-30 के आसपास, इस दोष का असर कम आँका जाता है, हालाँकि यह मत सर्वमान्य नहीं है और हर परंपरा इसे नहीं मानती। गणना के बाद अपनी स्थिति खुद कैसे पढ़ें, इसका व्यावहारिक तरीका मांगलिक दोष कैसे पता करें में कदम-दर-कदम समझाया गया है। किसी भी उपाय या अंतिम फ़ैसले से पहले पूरी कुंडली देखने वाले किसी योग्य ज्योतिषी की राय लेना ही सही रहता है – ज्योतिष परंपरागत मार्गदर्शन है, गारंटी नहीं।

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लग्न निकालना, मंगल की स्थिति पढ़ना और भाव गिनना – यह तीनों काम हमारे मुफ़्त कुंडली मिलान टूल में जन्म तिथि, समय और स्थान डालते ही अपने आप हो जाते हैं, और मांगलिक स्थिति पूरे 36 गुण मिलान के साथ सामने आ जाती है।

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